आत्म-निरीक्षण द्वारा आत्म-शुद्धि की साधना — सयाजी ऊ बा खिन की परंपरा में सत्यनारायण गोयन्काजी द्वारा सिखायी गयी विपश्यना। 10 दिवसीय निःशुल्क आवासीय शिविर।
विपश्यना भारत की अत्यंत पुरातन ध्यान-विधि है, जिसे लगभग 2500 वर्ष पूर्व भगवान बुद्ध ने पुनः खोजा। यह मन को निर्मल करने की एक सार्वजनीन, असांप्रदायिक विधि है।
दुर्ग ज़िले के शांत ग्राम थनौद में स्थित धम्म केतु में वर्ष भर 10 दिवसीय, सतिपट्ठान, एक दिवसीय और बच्चों के शिविर लगते हैं। शिविर पूर्णतः निःशुल्क हैं — रहने और भोजन का खर्च भी पुराने साधकों के स्वैच्छिक दान से चलता है।
आवेदन केवल ऑनलाइन होता है। किसी शिविर पर क्लिक करें — शिविर कार्यक्रम पेज खुलेगा, वहीं से आवेदन करें।
सूची 28 अक्टू 2026 की है — नवीनतम तारीखें और आवेदन शिविर कार्यक्रम पर देखें।
विपश्यना सीखने का आधार। नए साधक इसी से शुरुआत करते हैं। पूरे 10 दिन आर्य मौन।
नए और पुराने साधकसतिपट्ठान सुत्त के अध्ययन के साथ गहन साधना।
पुराने साधकअभ्यास को ताज़ा और मज़बूत करने के लिए एक दिन।
केवल पुराने साधकआनापान साधना — एकाग्रता और अच्छे संस्कारों के लिए। 1 और 3 दिवसीय।
8–15 वर्षकिशोरों के लिए विशेष आनापान शिविर।
किशोरशिविरों में सेवा देकर अपनी पारमी बढ़ाएँ।
पुराने साधकसुख-शांति का मार्ग — पूज्य गोयन्का जी के शब्दों में विपश्यना का परिचय। शिविर में आने से पहले अवश्य देखें।
सभी आधिकारिक वीडियो →सुबह 4 बजे से रात 9:30 बजे तक — साधना, विश्राम और संध्या प्रवचन का संतुलित क्रम।
अगले 10 दिवसीय शिविर के लिए आज ही आवेदन करें।